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Administrator News8/15/2016 10:54:00 PMNo Comments
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सिर्फ 3 महीने की तैयारी में फाइनल तक पहुंचीं जिमनास्ट दीपा ने करियर की बेस्ट जम्प लगाई थी, मेडल हारकर खूब रोईं

सिर्फ 3 महीने की तैयारी में फाइनल तक पहुंचीं जिमनास्ट दीपा ने करियर की बेस्ट जम्प लगाई थी, मेडल हारकर खूब रोईं

रियो डि जेनेरियो.रियो ओलिंपिक में 23 साल की जिमानस्ट दीपा कर्माकर 0.15 प्वाइंट से मेडल चूक गई थीं। वे वॉल्ट इवेंट में चौथी पोजिशन पर रहने के बाद मुस्कुराती रहीं। लेकिन जैसे ही खेलगांव पहुंचीं, फूट-फूट कर रोईं। उनके कोच बिश्वेश्वर नंदी कहते हैं, हमने सिर्फ तीन महीने की तैयारी में यह मुकाम पाया। ऐसे में, इतने कम प्वाइंट्स से मेडल चूकने पर अफसोस हुआ। दीपा को संभालना मुश्किल हो गया था। बता दें कि ओलिंपिक हिस्ट्री के 120 साल में ऐसा पहली बार हुआ है, जब कोई भारतीय एथलीट जिमनास्टिक्स के फाइनल तक पहुंचा था। कोच नंदी ने क्या बताया... - न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, कोच नंदी ने बताया- मामूली अंतर से ब्रॉन्ज से चूकना हमारे लिए जिंदगी का सबसे खराब समय रहा। हर कोई खुश था, लेकिन हमारी तो दुनिया ही मानो उजड़ गई और वह भी इतने मामूली अंतर से। हमारे लिए यह सबसे खराब इंडिपेंडेंस डे रहा।मैं धरती पर सबसे दुखी कोच हूं। - हमने सिर्फ तीन महीने तैयारी की, जबकि दूसरे जिमानस्ट पूरे साल तैयारी करते हैं। मैं विदेशी कोचों के खिलाफ हूं। हम कर सकते हैं, तो उनकी क्या जरूरत है। हमें फिट रहने और दीपा को टोक्यो ओलिंपिक 2020 तक फिट बनाए रखने के लिए फैसिलिटी चाहिए। - फाइनल में हार के बाद दीपा ने ट्वीट के जरिए देश से माफी मांगी। उन्होंने कहा- 1.3 अरब भारतीयों की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सकी। लेकिन मैंने काफी मेहनत की। अगर संभव हो तो माफ कर दें। कैसे थी करियर बेस्ट जम्प - प्रुडोनोवा वॉल्ट में डिफिकल्टी लेवल 17 से शुरू होता है जो 7 पर आकर खत्म होता है। दीपा ने 15.1 डिफिकल्टी लेवल हासिल किया जो उनके करियर का बेस्ट था। - उनके कोच नंदी कहते हैं, यह दीपा के करियर की सबसे बेस्ट जम्प थी। वह परफेक्ट थी। लेकिन जज उसकी लैंडिंग से कन्विंस नहीं हुए। वो शायद थोड़ा नीचे रह गई थी। - फाइनल वॉल्ट में दीपा के एवरेज स्कोर 15.066 रहा। प्रुडोनोवा के दो राउंड में उन्होंने 14.866 और 15.266 प्वाइंट्स के साथ फिनिश किया। प्रुडोनोवा के ‘डेथ वॉल्ट’ में दीपा ने 17 में से 15.10 प्वाइंट्स हासिल किए, जो उनका बेस्ट परफॉर्मेंस रहा। अमेरिका को मिला गोल्ड, रूस को सिल्वर - दीपा ने वॉल्ट इवेंट में डिफिकल्टी में 8.666 और एग्जीक्यूशन में 8.266 प्वाइंट हासिल किए। दीपा ने पहले अटेम्प्ट में 6 डिफिकल्टी और दूसरे में 7 डिफिकल्टी चुना था। - इस तरह, उन्होंने पहले अटेम्प्ट में 14.866 और दूसरे में 15.266 प्वाइंट हासिल किए। इसका एवरेज 15.066 बना। - अमेरिका की सिमोन बाइल्स ने 15.966 प्वाइंट के साथ गोल्ड और रूस की मारिया पेसेका ने 15.253 प्वाइंट के साथ सिल्वर और स्विट्जरलैंड की गुलिया एस. 15.216 अंकों के साथ ब्रॉन्ज में सफल रहीं। सरकार को भी बाद में समझ आया था - दीपा जब रियो के लिए रवाना हो रहीं थीं, तब उनके कोच नंदी और खुद दीपा ने स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री से अपने फिजियो साजिद मीर को साथ भेजने की अपील की थी। तब उनकी बात नहीं सुनी गई। लेकिन जैसे ही दीपा फाइनल में पहुंचीं, मिनिस्ट्री ने आनन-फानन में साजिद के पेपर्स तैयार कराए और उन्हें रियो भेजा गया। प्रोडुनोवा यानी वॉल्ट ऑफ डेथ लेकिन ऐसा क्यों? - दीपा की इस वॉल्ट में एक्सपर्टाइज है। जिमनास्टिक्स में सबसे ज्यादा प्वॉइंट्स प्रोडुनोवा में ही मिलते हैं। 90 के दशक में येलेना प्रोडुनोवा ने यह वॉल्ट शुरू किया। बाद में उन्हीं के नाम पर इस वॉल्ट का नाम पड़ा। उनके बाद दुनिया में सिर्फ 4 जिमनास्ट ही ये कर पाईं। उनमें दीपा भी शामिल हैं। - दीपा का अगला टारगेट टोक्यो में 2020 में होने वाला ओलिंपिक है। दीपा तब तक 27 साल की हो जाएंगी। - क्या इस तरह के जिमनास्टिक में उम्र असर डालती है, इस पर दीपा के कोच नंदी कहते हैं, फिटनेस जरूरी होगी। जिमनास्टिक्स में 32 साल की उम्र तक आप अपने करियर का बेस्ट दे सकते हैं। उज्बेकिस्तान की ओसाका क्यूसोवितिना तो 41 साल की हैं। वे रियो में 7th पोजिशन पर रही थीं। क्या होता है इस इवेंट में? - जिमनास्टिक्स में सबसे ज्यादा प्वॉइंट्स प्रोडुनोवा में ही मिलते हैं। - 90 के दशक में येलेना प्रोडुनोवा ने यह वॉल्ट शुरू किया। बाद में उन्हीं के नाम पर इस वॉल्ट का नाम पड़ा। उनके बाद दुनिया में सिर्फ 4 जिमनास्ट ही ये कर पाईं। उनमें दीपा कर्माकर भी शामिल हैं। - इसमें जिम्नास्ट 25 किमी/घंटे की रफ्तार से स्प्रिंगबोर्ड की ओर दौड़ लगाती है। - जमीन से 10-12 फीट की ऊंचाई हासिल करती है। - 1.7 सेकंड में दो फ्रंट समरसाॅल्ट लगाती है। यदि सिर के बल गिरे तो मौके पर ही मौत की आशंका। - फिर सामने सीधी लैंडिंग।

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